रक्षा बन्धनके शुभकामना (थारु भाषाके कविता)

रक्षा बन्धन के शुभकामना सब से सुन्दर जग मे, भाइबहिन के प्यारसावन सुक्ल पक्ष मे, आइल इ तेवहाररंगी बिरंगी राखी हाथ मे, बान्हल जाइप्यारी बहिन अइहे माइका, लेके इ मिठाई केतना प्यार से रचले बा एकरा के रचइतारक्षा करिह जीवनभर ,इहे बाटे मान्यतादेखत -देखत रात बितल, बित गइल दिनहमरे भैया रक्षाबन्धन मे साडी लैहे किन ना माङ्गे सोना चादी ना हिरा मोतीयाहमरा के चाहिँ बस, तोहर पिरितियाजिन्दगी भर दुवा करे,माङ्गे मनभावनाहमरा ओर से सब जनके रक्षाबन्धनके शुभकामना लेखक - रामदेव चौधरीठेगाना - कोल्हबी-२ बगेवा ( बारा) नेपाल

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तुही बताव हे फेसबुक, का बा नेपालके समाचार!!? (थारु भाषाके कविता)

तुही बताव हे फेसबुक, का बा नेपालके समाचार??ना बा टिभी रेडियो, ना टेलिफोन सञ्चारखेतबारी डुब गइल, टुटल घरबार!!तुही बताव हे फेसबुक, मातृभूमि के समाचार?? केतना लोग अनाथ भइली, केतना लचार!देश अाजु रोवत बारी, छाती अपन फार!!जाग-जाग हे जनता, जागहु सरकारतुही बताव हे फेसबुक, घरके समाचार? जन धन के नास भइल, जीवजन्तू परेसानपुल, नहर, सडक टुटल, कथिकरी किसान!!जब-जब सावन भादो आइ, मुटु थर-थराइकबो बाढीपहिरो त, कबो भुकम्प बढ जाइ!! लेखक:- रामदेव चौधरी कोल्हवी न.पा.२ बगेवा, बारा

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